हर वित्त वर्ष की शुरुआत में लाखों वेतनभोगी एक ही सवाल से जूझते हैं: पुरानी टैक्स रिजीम चुनें या नई? दोनों के पैरोकार नारों से लड़ते हैं, जबकि सच्चाई सीधी है — यह व्यक्तिगत गणित का सवाल है। जिनकी कटौतियाँ बड़ी हैं, उन्हें पुरानी रिजीम अब भी बचत दे सकती है; जिनकी कटौतियाँ कम हैं, उनके लिए नई रिजीम की घटी दरें और सरलता प्रायः बेहतर हैं।

यह लेख नियमों का ढाँचा और तुलना करने की विधि देता है। दरें और सीमाएँ बजट के साथ बदलती रहती हैं, इसलिए अंतिम निर्णय से पहले चालू वर्ष के आधिकारिक स्लैब अवश्य देख लें — तरीक़ा वही रहता है, संख्याएँ बदलती हैं।

दो रिजीम, दो दर्शन

पुरानी रिजीम का दर्शन है: “सरकार जिन कामों को प्रोत्साहित करती है, उन पर ख़र्च/निवेश करो और टैक्स घटाओ” — 80C (PPF, ELSS, जीवन बीमा, बच्चों की ट्यूशन फीस), 80D (स्वास्थ्य बीमा), HRA, होम लोन का ब्याज, NPS आदि मिलाकर अच्छी-ख़ासी आय कर-मुक्त हो सकती है। क़ीमत: काग़ज़ी अनुशासन और साल भर की योजना।

नई रिजीम का दर्शन है: “कटौतियों का जंगल हटाओ, दरें घटाओ” — गिनी-चुनी छूटों (जैसे वेतनभोगियों की स्टैंडर्ड डिडक्शन और नियोक्ता का NPS अंशदान) के अलावा कुछ नहीं, बदले में हर स्लैब पर हल्की दरें और ऊँची कर-मुक्त सीमा। अब यही डिफ़ॉल्ट रिजीम भी है — यानी कुछ न चुनने पर यही लागू होती है।

तुलना कैसे करें: तीस मिनट की विधि

क़दम एक: अपनी कुल कर-योग्य आय लिखिए। क़दम दो: अपनी वास्तविक कटौतियाँ जोड़िए — वही जो आप सचमुच करते/कर सकते हैं: 80C में कितना जाता है, स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम, HRA मिलता है या नहीं, होम लोन का ब्याज। क़दम तीन: आयकर विभाग का आधिकारिक कैलकुलेटर खोलिए और दोनों रिजीम में टैक्स निकालिए। जो कम, वही आपकी रिजीम — इस साल के लिए।

मोटा पैटर्न (हर साल सत्यापित करें): कुल कटौतियाँ जितनी बड़ी — ख़ासकर HRA + 80C + होम लोन ब्याज का मेल — पुरानी रिजीम उतनी आकर्षक। कटौतियाँ सीमित हों (किराया नहीं, लोन नहीं, निवेश PPF/ELSS से बाहर), तो नई रिजीम प्रायः जीतती है। वेतनभोगी हर साल रिजीम बदल सकते हैं; व्यवसाय-आय वालों के लिए अदला-बदली के नियम सख़्त हैं, इसलिए वे सोच-समझकर चुनें।

एक चेतावनी: पूँछ से कुत्ता मत हिलाइए

सबसे आम ग़लती टैक्स बचाने के लिए ख़राब उत्पाद ख़रीदना है — मार्च के आख़िरी हफ़्ते में जल्दबाज़ी में लिया गया महँगा एंडाउमेंट प्लान इसका क्लासिक उदाहरण है। कर-बचत निवेश भी पहले “अच्छा निवेश” होना चाहिए: PPF, ELSS, NPS, टर्म बीमा — ये अपने दम पर खड़े उत्पाद हैं, टैक्स लाभ इन पर ऊपर से मिलता है।

रिजीम कोई भी चुनें, सिद्धांत एक ही है: टैक्स योजना वित्तीय योजना का हिस्सा है, उसका विकल्प नहीं। पहले लक्ष्य, फिर उत्पाद, और उसके बाद यह देखना कि कौन-सी रिजीम उस तस्वीर पर कम टैक्स लगाती है।